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श्री जय बाबा इंटर कॉलेज , सकरवा गोवर्धन मथुरा

श्री जय बाबा इंटर कॉलेज , सकरवा गोवर्धन मथुरा पर स्थित है । हमारे विद्यालय में योग्य एवं शिक्षित अध्यापक / अध्यापिका शिक्षण कार्य करते हैं । वे बच्चों को शिक्षित बनाने का कार्य पूर्ण रूप से करते हैं । हमारे विद्यालय में बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए समय - समय पर प्रतियोगिताएं आयोजित की जाती हैं । जिससे बच्चों में फुर्ती बराबर बनी रहती है । समय - समय पर हमारे विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई को ध्यान में रखते हुए टैस्ट की व्यवस्था की जाती है । हमारे विद्यालय में अन्य विद्यालयों की अपेक्षा उच्च शिक्षा प्रदान की जाती है और समय - समय पर बच्चों के | माता - पिता को बच्चे के बारे में बताया जाता है जिससे ब��्चे का मन पढ़ाई में लगा रहे । हमारे विद्यालय में समय - समय पर ज्ञान से सम्भावित परीक्षा भी ली जाती है । हमारा विद्यालय अन्य और विद्यालयों से श्रेष्ठ है जिसके कारण बच्चों में उच्च शिक्षा का आदान - प्रदान योग्य शिक्षकों एवं शिक्षिकाओं द्वारा दिया जाता है । हमारे विद्यालय में कम्प्यूटर की उचित व्यवस्था है । आज के युग को देखते हुए कम्प्यूटर बच्चों के लिए अनिवार्य विषय बन चुका है । इसी युग को ध्यान में रखते हुए हमारे विद्यालय में कम्प्यूटर की पढ़ाई करायी जाती है और जिस घर में माता - पिता अपने बच्चों पर ध्यान देते हैं उनके बच्चों के लिए हमेशा अच्छा होता है । सबसे पहले माता - पिता ही अपने बच्चे के संस्कार के जिम्मेदार होते हैं । हमारे विद्यालय में भी बच्चों के अन्दर अच्छे संस्कार दिये जाते हैं । जिससे बच्चे अच्छे संस्कार पा सकें । समाज में मानव को अच्छे संस्कार अच्छे विद्यालय से मिलते हैं , हमारे विद्यालय में संस्कारवान शिक्षा प्रदान की जाती है डायरेक्टर :पुष्पा रानी

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विद्यालय की परिकल्पना

भारतीय नारी की पहचान अनादिकाल से उसके साहस , शौर्य और त्याग के लिए भारत ही नहीं , वरन् सम्पूर्ण विश्व में है । बदलते समय और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप वह बदलती बदलती आज आधुनिक भारतीय नारी के रूप में विश्व के सम्मुख दृष्टिगोचर हो रही है । कोई भी क्षेत्र ऐसा नहीं है , जिसमें वह पुरुष के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अग्रसर न हो रही हो । बल्कि अपनी योग्यता और ज्ञान के बल पर वह समाज के लिए शिक्षा भी दे रही है । भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी भी कहते हैं कि आधुनिक भारत का निर्माण बिना नारी की सहभागिता किये कभी नहीं किया जा सकता । इसलिए आज की बाल��का कल की एक क्षमतावान नारी के रूप में स्थापित हो , इसके लिए उसे शिक्षा जैसे संबल की महती आवश्यकता है और इन आवश्यकताओं के रूप में " बेटी पढ़ाओं - बेटी बचाओं " का नारा आज हर जगह गूँज रहा है । उनके देवी ने भी श्री जय बाबा इंटर कॉलेज , सकरवा गोवर्धन मथुरा की नींव रखी और हर तरह से बालिकाओं के विकास के लिए सदा तैयार रहने का संकल्प लिया । उनकी ऐसी सुस्पष्ट सोच और बालिकाओं का विकास निश्चित रूप से इसी भारत की ���रा को फिर से गौरवान्वित करने का एक सराहनीय कदम है । वे कदम - कदम पर इस संस्था के माध्यम से पथ - प्रदर्शक बन बालिकाओं के भविष्य को उज्ज्वल भविष्य बनाने की ओर सदा अग्रसर रहेंगी.

शिक्षण विषय एवं विधि

हिन्दी , अंग्रेजी , संस्कृत ( विज्ञान - गणित N.C.E.R.T. ) कला , कम्प्यूटर , सामाजिक आदि विषयों का अध्यापन प्रश्नोत्तर एवं क्रियात्मक विधि द्वारा सुयोग्य शिक्षकों द्वारा हिन्दी तथा अंग्रेजी माध्यमों से कराया जाता है । विषय का सतत् मूल्यांकन होता है । शिशु कक्षाओं में शिशुओं में अधिक विकास की भावना जागे इसलिए गीत कहानी के रोचक माध्यमों से सुयोग्य एवं | विनम्र शिक्षिकाओं द्वारा शिक्षा दी जाती है । पहाड़ा , सुलेख ( हिन्दी व अंग्रेजी में ) अनुलेख प्रतियोगितायें सहायक प्रक्रिया के | रूप में शिशुओं के सम्यक् विकास के लिए आयोजित की जाती है । छात्र संसद एवं विभाग वितरण परिवार , समाज एवं देश की अच्छी व्यवस्थायें भावी नागरिक देश के बच्चे ही देते हैं । इस निमित्त विद्यालय में छात्र | संसद ( शिशु भारती ) का गठन करके बच्चों को अपने दायित्व का उचित निर्वाह करना सिखाने के लिए विभिन्न विभागों में व्यवस्था बाँटी जाती है। श्री जय बाबा इंटर कॉलेज , सकरवा गोवर्धन मथुरा को इण्टरमीडिएट की मान्यता प्राप्त सहर्ष सूचित किया जाता है कि सत्र 2014-15 से विद्यालय में इण्टर कला एवं विज्ञान वर्ग की कक्षायें मान्यता प्राप्त होने के बाद निम्न विषयों में संचालित है

कला वर्ग 1. हिन्दी 2. अंग्रेजी 3. अर्थशास्त्र 4. नागरिक शास्त्र 5. भूगोल 6. इतिहास 7. समाजशास्त्र

विज्ञान वर्ग 1. हिन्दी 2. अंग्रेजी 3. गणित 4. भौतिक 5. रसायन 6. जीवन विज्ञान 7. कम्प्यूटर

प्रवेश सम्बन्धी सूचनाएँ एवं अर्हता

( 1 ) सामान्यतः शिशु कक्षाओं में ही प्रवेश ���ो पायेगा जिसके लिए शिशु की अवस्था चार वर्ष होनी चाहिए , जोकि | मानसिक एवं शारीरिक रूप से प्रवेश के योग्य मानी जाती है । ( 2 ) प्रवेश के समय जन्म प्रमाण - पत्र देना आवश्यक है । ( 3 ) फार्म जमा करते समय शिशु को इन्द्रिय विकास में परिवार की जानकारी एवं कक्षानुसार प्रश्नों का उत्तर देना होता है । ( 4 ) अभिभावकों को यह आश्वस्त करना होगा कि वह विद्यालय के साथ सामंजस्य बनाकर सभी नियमों का पालन करेंगे । ( 5 ) स्थान रिक्त होने पर अन्य कक्षाओं में प्रवेश , प्रवेश परीक्षा के माध्यम से ही हो पायेगा ।

दो - शब्द

अन्य विद्यालयों की अपेक्षा इस प्रकार संस्कारवान शिक्षा हमारे ग्रामीण क्षेत्र के विद्यालय श्री जय बाबा इंटर कॉलेज , सकरवा गोवर्धन मथुरा में प्रदान की जाती है । इस विद्यालय का मूल उद्देश्य बच्चों में पढ़ाई के साथ - साथ उच्च संस्कार प्रदान करना भी ���ै , जो कि हमारे भारत की मूल संस्कृति है । इसमें शिक्षण कार्य कराने हेतु योग्य , अनुभवी एवं प्रशिक्षित शिक्षक व शिक्षिकाएँ तथा कर्मठ व आदर्श प्रधानाचार्य हैं । विद्यालय का वातावरण शान्त एवं स्वच्छ , उचित पानी की व्यवस्था है । समय समय पर विभिन्न प्रकार की प्रतियोगिताऐं आयोजित की जाती हैं जिससे कि समाज के सामने नयी प्रतिभाऐं निखर कर आती हैं जोकि इस देश की उन्नति में चार चाँद लगा देती है । ।

अभिभावकों निवेदन

1. बालकों को स्वच्छ एवं व्यवस्थित वेश में विद्यालय भेजें । 2. दैनिक समय सारिणी के अनुरूप बस्ता भेजें तथा बालक के साथ स्वल्पाहार ( भोजन ) अवश्य रखें । 3. बालक / बालिका को रुपया देकर विद्यालय न भेजें । 4. बालक / बालिका की व्यवस्थित दिनचर्या रखें । जैसे ( प्रातः जागरण , शौच , मंजन , स्नान , ध्यान ) और स्वाध्याय के प्रति सचेत रहें । 5. बालक / ब��लिका से सम्बन्धित शिकायत अथवा सुझावों से प्रधानाचार्य को प्रतिमाह अवश्य अवगत कराते रहें । 6. विद्यालय में आयोजित होने वाले कार्यक्रमों जैसे ( गोष्ठी , सम्मेलन ) आदि में प्रतिभागिता हेतु बालक / बालिका का मनोबल अवश्य बढ़ायें । 7. शिक्षणेत्तर कार्यक्रमों में शिशु भाग लें , उसमें अभिभावक पूर्ण सहयोग प्रदान करें । 8. शिशु के हितार्थ गृहकार्य में सहयोग करें । 9. बालक / बालिका नियमित विद्यालय आयें । इसके विशेष ख्याल रखें । 10. अत्यावश्यक होने पर बालक / बालिका के साथ कारण बताते हुए अवकाश प्रार्थना पत्र साथ भेजें । जिस पर आपके हस्ताक्षर होना आवश्यक है । 11. बालक / बालिका के साथ और समक्ष मृदु व्यवहार करें , जिससे वह अच्छे संस्कार ग्रहण कर सकें । 12. बालक / बालिका चरण स्पर्श या नमस्ते करके ही विद्यालय आयें , इसका ख्याल रखें । 13. शिशु आपस में भैय्या / बहिन कहकर ही बोलें । 14. अध्ययन ( पढ़ाई ) समाप्त करने क��� उपरान्त बालक / बालिका गृहकार्य में ( घर के कामों ) में हाथ बटायें , ऐसी अभिभावक आदत डालें । 15. माता - पिता अध्यापक एवं परिवार के प्रति कर्त्तव्यों का बोध बालक को करायें , ऐसी अपेक्षा करते हैं ।

सहपाठ्य क्रिया - कलाप

( 1 ) प्रश्न मंच प्रतियोगिता : - अपनी संस्कृति , समाज , इतिहा��� व धर्म की विशेष जानकारी मिले , इसलिए पाठ्यक्रम के अतिरिक्त पुस्तकों के अध्ययन द्वारा प्रश्न मंच प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है जिसमें विज्ञान व | वैज्ञानिकों की देन , महापुरुषों , कवियों , गणितज्ञों , देशभक्तों आदि के बारे में प्रश्न पूछे जाते हैं । ( 2 ) भाषण प्रतियोगिता : - - बच्चे समाज की हर समस्या के विषय में जानकारी के साथ - साथ अपने मन के भावों को व्यक्त करने की योग्यता व साहस प्राप्त कर सक���ं इसलिए भाषण प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है । ( 3 ) निबन्ध प्रतियोगिता : - किसी भी विषय के सम्यक् प्रतिपादन हेतु लेखन शक्ति का होना परम आवश्यक है : अतः इसकी पूर्ति हेतु निबन्ध प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है ( 4 ) खेलकूद प्रतियोगिता : - स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मस्तिष्क निवास करता है । इसके लिए कबड्डी , खो - खो , | बॉलीबॉल आदि खेलों का आयोजन प्रतियोगिता के माध्यम से किया जाता है । जिसमें नगर विकास ��ण्ड जनपद एवं प्रदेश | स्तर की शासकीय खेलकूद प्रतियोगिताओं में भी स्थान प्राप्त करके छात्र एवं छात्रायें अपने विकास के साथ विद्यालय का | गौरव बढ़ाते हैं ।.

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